पापी पेट के सवाल बा
जहा भी देखेम,हर जगहा
आम आदमी के ईहे हाल बा
काजू,बदाम त दूर भईल
अब त दलियो मोहाल बा
आज कमईनी,आजे खईनी
काल्ह के ना कौनो ठेकान बा
केकर केकर नाव ली
महंगाई से सबे बेहाल बा
कही आईल बा,बाढ़ देश में
कही पडल अकाल बा
दिल्ली में बईठी ऐसी में,नेता कहस
देश के जनता बहुते,खुशहाल बा
भोट देके जे पहूचऊलस,राजधानी
से सुते पलटेफारम पर
दबा के चप्पल सिरहानी
आ ओकरे पेट पर मार के लात
नेता सगरो,देश के लूटी,भईल निहाल बा
रोम रोम खडा हो जाला आजो जब सुनेनी
“जहा डाल डाल पर सोने की चिड़िया
करती है बसेरा ,वोह भारत देश है मेरा”
भुलाजानी की पुरान ई होगईल,मिसाल बा
धन सगरो ध अईले नेता ,स्विस बैंक में
खजाना देश के कंगाल बा
सतरंगी जीवन भुला गईल
अब हर ओरी एकके रंग के जाल बा
रंगों में पूछी कईसन रंग
जीवन के रंग अब खाली लाल बा
घर गिरहस्ती,मेहर बेटी
उलझ के रह गईल बा येही में जिन्नगी
ना होई हमसे क्रान्ति भा संग्राम
देश त बा पाछे अबे,पाहिले पापी पेट के सवाल बा
ye kavita ke maadhyam se hum ego aam aadmi ki man ke vyatha kahe ke koshis kaile baani , jekra apna desh ke sthithi par dookh ba , baakir oo aapan asamarththa bhi vyakt kara tha aa kaha tha ki oo kuch ka nahikhey sakat
“जीवन के रंग अब खाली लाल बा” >> laal sabd ke upma ya rupaalankaar prayog kari ke hum “tyaag” aa “balidaan” ke aija darshaave ke koshish kailey baani

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