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Archive for the ‘Bhojpuri’ Category

पापी पेट के सवाल बा

August 7, 2010 Leave a comment

जहा भी देखेम,हर जगहा
आम आदमी के ईहे हाल बा
काजू,बदाम त दूर भईल
अब त दलियो मोहाल बा

आज कमईनी,आजे खईनी
काल्ह के ना कौनो ठेकान बा
केकर केकर नाव ली
महंगाई से सबे बेहाल बा

कही आईल बा,बाढ़ देश में
कही पडल अकाल बा
दिल्ली में बईठी ऐसी में,नेता कहस
देश के जनता बहुते,खुशहाल बा

भोट देके जे पहूचऊलस,राजधानी
से सुते पलटेफारम पर
दबा के चप्पल सिरहानी
आ ओकरे पेट पर मार के लात
नेता सगरो,देश के लूटी,भईल निहाल बा

रोम रोम खडा हो जाला आजो जब सुनेनी
“जहा डाल डाल पर सोने की चिड़िया
करती है बसेरा ,वोह भारत देश है मेरा”
भुलाजानी की पुरान ई होगईल,मिसाल बा
धन सगरो ध अईले नेता ,स्विस बैंक में
खजाना देश के कंगाल बा

सतरंगी जीवन भुला गईल
अब हर ओरी एकके रंग के जाल बा
रंगों में पूछी कईसन रंग
जीवन के रंग अब खाली लाल बा

घर गिरहस्ती,मेहर बेटी
उलझ के रह गईल बा येही में जिन्नगी
ना होई हमसे क्रान्ति भा संग्राम
देश त बा पाछे अबे,पाहिले पापी पेट के सवाल बा

ye kavita ke maadhyam se hum ego aam aadmi ki man ke vyatha kahe ke koshis kaile baani , jekra apna desh ke sthithi par dookh ba , baakir oo aapan asamarththa bhi vyakt kara tha aa kaha tha ki oo kuch ka nahikhey sakat

“जीवन के रंग अब खाली लाल बा” >> laal sabd ke upma ya rupaalankaar prayog kari ke hum “tyaag” aa “balidaan” ke aija darshaave ke koshish kailey baani

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बचपन के याद

August 4, 2010 Leave a comment

नन्ही नन्ही हथवा से,धई के खुरुपिया
पिछ्वारिया के खोनल ज़मीनिया ,याद आवेला
खोनल गड़ाहवा में गोडल,चापल आम के अठुलिया,
आजो याद आवेला

बरखा में जनि भागा ,ईआ बाबा के बतिया
लड़कपन के ज़िद में न मानल ऊ बतिया
भागत भागत अंगना में बिछलईलका
आजो याद आवेला

सबसे चोरा के नजरिया,पोखरवा पर
पांक पांक होके,मारल,मछरिया याद आवेला
चढ़ के सीटपायलिया पर,छप से पनिया में कूदल,
सीखनी जहा पौडकिया, ऊ नहारिया याद आवेला

दिन भर घूमी , आनकर खेत से ऊंख तूरी ,कोन कोडी,
आ तुरी आम ,पहुचे सब केहू बाबा लगे देबे खबरिया ,
तब त बरे खीस बहुत ,अब सबकर ओरहनिया याद आवेला

गरमी के छुट्टी में घरे लोग बढ़ी जाओ,सुते के बेरी न तकिया भेटाव
सबका सुतला के बाद,सिरहाने से खीचल, सिरहनिया याद आवेला
रही रही सोचेनी, जब गऊआ में बीतल,बचपन के बतिया,
लाख जतन कईलो पर, एक कतरा आंसूं अंखियन में ,उतरिये आवेला |

(ये कविता के ज़रिये हम अपना बचपन के याद ताज़ा करे के कोसिस कईले बानी , अगर पसंद आवे था ज़रूर सूचित करेंम )

Categories: Bhojpuri

जब ना भरल होखे अंखिया,उनकर सुरतिया से

August 3, 2010 Leave a comment

हम अपना ओरी के काफी लोग के देखले बानी जे एकदम दुबई जाए खातिर बेचैन रहेला,लोग नया नया शादी करेला आ अपना मेहर के छोड़ के चली जाला कमाए,ई बात कबो कबो हमरा समझ के बाहर रहेला की केहू कैसे ओ लईकी के छोड़ के जा सकेला जे आपन सगरी संसार छोड़ के ओकरा भरोसे आइल होखे ! अपना ए कविता की जरिये हम वो लईकी के मनोव्यथा के चित्रण करे के प्रयास कईले बानी |

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माई,बाप,दर-देआद सब छोड़नी
छोड़नी सौंसे जवार जेकरा खातिर
सेही जा बईठल बिदेश,हमरे के छोड़ी
बस दू रुपिया बेसी कमाए के खातिर

कोठी न मंगनी,न कोठा आला घरवे पिया से
न मंगनी पलंग,न खटिये पिया से
मंगनी न हंसुली,न नथिये पिया से
मंगनी त मंगनी बस अपना पिया के
काहे ना बुझलन सैंया,बात हमरा जिया के

जब ना भरल होखे अंखिया,उनकर सुरतिया से
भरल होखे ई त,अंखियन के मोतिया से
जात बेरा देखलन ऊ,मुस्की ओठवा के
ना देखलन पिअऊ,लोरवा अंखियां के

दियरखा के दीअओ,बिन अंहिये के,अब रही रही बुताला
बेरा कुबेर मोर मनवा, रही रही औंजियाला
आकुर बाकुर सोची बतिया,अब जियरा डेराला
मुरही ननदिया के बतिया ना,तनिको सोहाला
देख खाली कोंखियाँ ,कोसे टोला मोहाला
कह तानी छोड़ी सब लजिया शरामिया
आजा बलम अब,की कट जाला दिनवा ना रतिया कटेला

-आज़ाद बिहारी
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जात धरम के नाम पर

जात धरम के नाम पर,
लोगन में ई कैसन जूनून देखनी
सब केहू के हाथ पर,
केहू न केहू के खून देखनी
जहा आदम के दौर में सब ओरी
सुख चैन सुकून देखनी
अपना दौर में जहा देखनी
त्राहि त्राहि आ खून देखनी

-आज़ाद बिहारी

Categories: Bhojpuri

ई धरती ह बिहार के


“ई धरती ह बिहार के” is my 100th documented poem,and i am dedicating this to my land and my language, Jai Bihar, Jai Hind !

अंग,विदेहा,मगध,वैशाली,
जइसन रहे सम्राज जहा
गुप्त काल सन,मौर्या कल सन,
भारत के स्वर्णिम काल जहा
विक्रमशिला आ नालंदा जइसन,
रहे अनुपम संस्थान जहा
ई धरती ह बिहार के |

सविनय अवज्ञा आंदोलन,गांधी के,भईल शुरू जहा
बीर कुंवर सिंह,खुदीराम,बैकुंठ शुक्ल,राजेंदर बाबू ,
जे पी, जइसन महापुरुसन के जनम भईल जहा
ई धरती ह बिहार के |

गम गम महके माटी जहा
गंगा,गंडक,बागमती संग
कोसी के आशीर्वाद जहा
होखे गेहू होखे धान
उपजे हर खलिहान जहा
ई धरती ह बिहार के |

न्यूयोर्क के हो रोल बिहारी
मोतिहारी के ताश जहा
पुआ,ठेकुआ,सतुआ,मकुनी,भुजा,लाइ,
लिट्टी-चोखा,जइसन पकवान जहा
ई धरती ह बिहार के |

छठ पूजा होखे या फागुन,
रंग चढे बस सुख के जहा
हंसी खुसी मिल जुल कर ,
लोग मानावे परब जहा
ई धरती ह बिहार के |

मन कुंठित बा देखकर
की आज सीना एकर भारी बा
दुख के बद्री,कई सालन से
बरसल बारी बारी बा
मत बढ़अ आगे,एकबेर एके खाली निहार के
फेन उठी ई अमरपक्षी सन,
लिख दी आपन नाम जहा में,
ई धरती ह बिहार के |

-आज़ाद बिहारी

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